मैं ने सोचा
मैं ने बहुत सोचा
उत्तर क्या होगा
कारण क्या होगा
जगह कौन सी होगी
त्रितीय विश्व युद्ध् का
मैं बोला ‘औरत’
तो दोस्तों से
गुरू से मार खाई
अर्थशास्त्रियों ने कारण
पानी बताया
तो लगा कि बात में दम होगा
पर खून जब न खौला पड़ोसियों
को गाड़ी धोते देख
न तब भी जब बढ़ गई तपती धूप
में मेरी प्यास
‘जेब में था पैसा, बिसलरी पानी, कोक आदि’
तो जिज्ञासा न बुझी
पर एक दिन पाखाने मएं बैठा
जब हलके होने
हलके होकर जब नल खोला
और नल खोलके
निन्यानबे प्रतिशत से भरे
जलाशय से
जब पानी न आया
तो कर दी सब की माँ बहन एक
तब ज्ञान आया,
सोच से नहीं, वरन अनुभव से,
हर कब, क्यों और कहाँ का
‘पाखाना’
लेखक : अरविंद्सिंह
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