आज
गुरुवार २६ अपैल २०१२ को विश्व हिंदी सचिवालय द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय संगोष्ठी
तथा कार्यशाला, जो २३ से २७ अप्रैल २०१२ तक रजीव गांधी साइंस सेंटर में चल
रही है का चौथा दिन था. प्रथम दिवस की संगोष्ठी
के पश्चात, द्वितीय दिन को कार्यशाला का आरम्भ हुआ जिसमें विशेषज्ञों
ने प्रतिभागियों को हिंदी में टंकण की विधियाँ, सोफ्ट्वेयर और उनके
अधिष्ठापन विधियों को समझाने के पश्चात, दूसरे दिन ब्लॉग तथा ब्लॉगिंग कराना सिखाया गया. साथ ही साथ प्रतिभगियों को टोलियों में विभाजित
किया गया ताकि कार्य अधिक सुगम हो जए.
प्रथम कार्यशाला से ही सभी के बीच उतसुक्ता की लहर
उमड़ने लगी. सभी जुट गए कुछ लिखने, कुछ बनाने में. इन
दृश्यों को देख सचिवालय के उप महासचिव श्री गुलशन सुखलाल के शब्द कुछ इस प्रकार थे
“ आनंद आ गया, ऐसा लगा कि हम ‘तारे ज़मीन पर’ के अंतिम दृश्य को देख रहे है.”
कार्यक्रम
का तीसरा दिन दूसरे दिवस का ही सेतु के रूप था. पिछले दिनोँके ज्ञान को और विस्तृत
करने का प्रयास किया गय. कार्यशाला का आरम्भ प्रतिभगियोँ को फेस्बुक से परिचइत
करने में हुआ. इस सत्र में श्री ललित कुमार ने इस ‘वेब पेज’ की यथा सम्भव व्याख्या
की. फिर उन्होंने प्रश्नोत्तर द्वारा प्रतिभागियों
की शंकाओं को दूर किया.
इस
के बाद बालेंदू जी ने अपनी अनोखी शैली में एक अन्य दिलचस्प विषय ‘वेब डिजाइनिंग’ प्रस्तुत किया. उन्होंने प्रतिभागियों के इस भ्रम को मिटाया कि
‘वेब
डिजाइनिंग’ एक कठिन कार्य है. पहले तो उन्होंने सिखाया कि कैसे ‘ऑफ्लाइन’ ही एक वेब पेज बनाया जा
सकता है. फिर अपने स्वनिर्मित सॉफ्ट्वेयर ‘वेब समर्थ’ के माध्यम से सभी का मन
मोह लिया जब कुछ मिनटों में ही उन्होंने एक ‘वेब साइट’ का निर्माण कर अन्तर्जाल
पर उसे प्रकाशित कर दिया.
सारांश
में आज का दिन भी ज्ञानप्रद रहा.
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