धन्यवाद की फेहरिस्त लम्बी है...
किसे पह्ले धन्यवाद दूं सभी जिम्मेवार हैं
मेरे सपने को पूरा करने में !
कोटिश: धन्यवाद.... गुलशन जी आपको और सुश्री पूनम जी,
पूर्णिमा जी , ललित जी एवं बालेंदु जी को
भी.
जैसा कि मैंने पहले भी कहा था “वेब
साईट” बनाना मेरे लिए सपना ही नहीं आवश्यकता भी थी.
जी हाँ अब मैं गुनगुना सकती हूँ “
सच हुए सपने मेरे... “
कम्प्युटर से संबंधित कई परेशानियों का हल मुझे
मिला.. दिशा मिली , मार्गदर्शक मिले , सहायता मिली, उत्साह और प्रेरणा भी मिली.
आशा ही नहीं विश्वास भी है कि हिंदी के प्रचार-प्रसार
में इस कार्यशाला में सीखी गयी हर चीज़ सहायक होगी.
आगे बढ़ने,सीखने सिखाने का यह
सिलसिला सतत चलता रहे ईश्वर से यही विनय है !!
सदैव आभारी ,
कुमुदिनी
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