गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

विनय गुदारी


अधूरा गीत

एक  गीत लिखना  चाहूँ 
जहाँ  शब्द  बने  तेरी  मुस्कान
जहाँ  लय  बने  हमारा  प्यार
जहाँ  तुकबंदी  करे  हमारी  जान
जहाँ  शामिल  हो  हमारा  संसार
अधुरा  ही  है  वो  गीत
जिसमें  है  एहसास  का  संगीत

है  जिसमे  तू 
ए मेरे  प्रीत
 
मगर  है  कम  एक  तारा
जो  न  बन  पाए 
मेरे  गीत  का  अन्तरा

विनय गुदारी 

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