पासवर्ड
सुबह जब जागा
तो मोबाईल को
चार्ज पर से
निकाला और
ऑन करने के लिए
कोड डाला
तैयार होकर ऑफिस पहुँचा
वहाँ दर्वाज़े का कोड डालकर लाल बत्ति हरी की
फिर कम्प्यूटर ने मांगा अपना पासवर्ड
और जब पैसे निकालने ए.टी.एम तक पहुँचा
तो एक और…
दिन भर के कामों को अनलॉक करता हुआ
जब शाम को घर पहुँचा
तो सीधे
बिस्तर पर क्रैश हो गया
पड़ोसी, दोस्त
और रिश्तेदार तो एंटर कर नहीं पाए
बीवी, बच्चों, माता
पिता को भी मेरी दुनिया में
एक्सैस मिला नहीं...
ज़िन्दगी में बेमानी हो चली
कुछ भावनाओं, नर्मियों को
दिल के जिस फोलडर में
रखा था
उसका पासवर्ड...
मैं कहीं भूल
गया।
गुलशन
07/06/07
“ बैक अप रखिये महाशय” ... और भूलने की आदत सुधारिये... चलिये यह तो हुई कुछ हल्की फुल्की बात पर सच तो यह है कि “ पास वर्ड” तो दूर की बात है जनाब लोग तो यह भी भूल जाते हैँ कि उन्होँने कोमल भावनाओँ और नर्मियोँ की कोई फाइल भी कभी बनायी थी... उम्मीद है कम से कम तुम यह कभी नहीँ भूलोगे ...
जवाब देंहटाएंइसी आशा मेँ,
कुमुदिनी