हाथों की ऊँगलियों को डबोचते हुए
लटके
इस डर से कि कहीं टूट न जाए
रंग-बिरंगी थैलियाँ
अपने आपको कभी खुशनसीब
तो कभी संतुष्ट समझकर
कारण और क्या है?
किसी में महेंगे तो किसी में सस्ते सामान
वे सामान जो गरीबों और गरीब खानों
अमीरों और महलों की
सजावट के लिए
अपने अस्तित्व को रूप देंगे
अकसर उन बेघरों और अनाथों को भूलना
एक आदत सी बन गयी है।
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जवाब देंहटाएंतुम्हारे ह्रदय की सम्वेदन शीलता का अह्सास दिलाती तुम्हारी कविता तुम्हारे हुनर की पह्चान है... इसे हमेशा संजो कर रखना...कुमुदिनी
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