बन्दर की
गुलाटी
राम ने रावण को मारा
सभी को पता चला था
बधाइयाँ बजी थीं
दीवालियाँ मनाई गई
थीं
आज भी मनाई जाती हैं
लेकिन...
दीवाली की झिलमिलाती
रोशनी
या बड़े बड़े बनावटी
समारोहों के
चुन्धियाने वाले
बल्बों की चकाचौन्ध में
भाषणों में
अभिव्यत्क झूठ में
अखबारों की
सूर्खियों में
यह सत्य दिख गया
कि हम सभी से बोला
गया था
बहुत बड़ा झूठ
राम ने रावण को नहीं
मारा...
उसे अमरत्व दे
दिया...
आज भी राज है उसी का
और रावण के राज्य
में
आज मैं,
राम की सेना का अदना
सा बन्दर,
रावण के डमरू की तान
पर
गुलाटी मारना सीख
रहा हूँ
सीख जाऊंगा...
अरविन्द

वाह मेरे शेर क्या कविता है मेरे भाई। इसे कहते हैं यथार्थ की झलक!!!!!!!!!
जवाब देंहटाएंअरविन्द जी हम भी आप ही की तरह गुलाटी मारना सीख रहे है!
जवाब देंहटाएंवशिष्ठ