गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

अरविन्दसिंह नेकित्सिंह



बन्दर की गुलाटी

राम ने रावण को मारा
सभी को पता चला था
बधाइयाँ बजी थीं
दीवालियाँ मनाई गई थीं
आज भी मनाई जाती हैं लेकिन...

दीवाली की झिलमिलाती रोशनी
या बड़े बड़े बनावटी समारोहों के
चुन्धियाने वाले बल्बों की चकाचौन्ध में
भाषणों में अभिव्यत्क झूठ में
अखबारों की सूर्खियों में
यह सत्य दिख गया
कि हम सभी से बोला गया था
बहुत बड़ा झूठ
राम ने रावण को नहीं मारा...

उसे अमरत्व दे दिया...
आज भी राज है उसी का
और रावण के राज्य में
आज मैं,
राम की सेना का अदना सा बन्दर, 
रावण के डमरू की तान पर
गुलाटी मारना सीख रहा हूँ

सीख जाऊंगा...



अरविन्द 

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह मेरे शेर क्या कविता है मेरे भाई। इसे कहते हैं यथार्थ की झलक!!!!!!!!!

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  2. अरविन्द जी हम भी आप ही की तरह गुलाटी मारना सीख रहे है!
    वशिष्ठ

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